रंग हो बहार का, खुशियों का, त्यौहार का
उल्लास का, अरमान का
आओ मिलकर खेलें होली
न रहे कोई उदास, ऐसा बने संसार
हर सुबह हो वसंत, दुख का हो अंत
आओ मिलकर खेलें होली
घृणा का घाव घट मरे
विश्वास भाव भर उठे
आह्लादित हो हर बोली
आओ मिलकर खेलें होली
हर घर हर दिन चूल्हा चले
गरीबी का नाम-ओ-निशान मिटे
हर बचपन चहचहा उठे
आओ मिलकर खेले होली
हर बेटी स्वच्छंद हो
हर मां का आशीर्वाद ले
हर हाथ कलम मिले
आओ मिलकर खेलें होली
हर गुरु का सम्मान हो
हर अभिमान का नाश हो
परिवर्तन की सुबह कह उठे
आओ मिलकर खेलें होली
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