आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं |
- 25
- August
- 2016
कुछ विद्वान कहते हैं कि आज पुराने जीवन मूल्य उध्वस्त हो गये हैं। आज यंत्र युग-तंत्र युग-विज्ञान युग है। युग के अनुसार अब नये मूल्य स्थापित हो रहे हैं। परन्तु यह केवल आभास है। जीवन के मूल्य सनातन और चिरन्तन होते हैं। उनका बाह्य स्वरूप, उन्हें प्रकट करने के साधन, परिस्थिति, परिणाम, क्रम ये बातें बदलती होंगी परन्तु मूल्य वे ही हैं। और भविष्य में भी वही रहेंगे। पात्र के आकार से जिस प्रकार पानी बदलता नहीं , काष्ठ के प्रकार से जैसे अग्नितत्व बदलता नहीं वैसे ही आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक अथवा अन्य कोई परिवर्तित परिस्थिति से जीवन मूल्य नहीं बदलते हैं।
महाभारत का इतिहास और साथ ही भारतवर्ष का इतिहास भावमूलक है। महाभारत आर्य राष्ट्र का अखण्ड स्फूर्तिप्रद सांस्कृतिक ज्ञानकोश है और उसमें अखिल मानवता को कल्याण का मार्गदर्शन करने की शक्ति है। आज अखिल मानवता की छीछालेदर हो रही है। उसमें मानवता का पुनरू़द्धार करने तथा उसका मंगलमय निर्माण करने की लिए जिस तत्वज्ञान की तथा जिन मूल्यों की आवश्यकता है उसकी पूर्ति तत्वज्ञ श्रीकृष्ण की भूमिका से प्रगट होती है। मानवता के प्रति किया गया भारतीय राष्ट्र का महान कार्य महाभारत ने प्रदर्शित किया है। वह महान कार्य मानवता में देवजीवन उत्पन्न करना है। मानवता के अपने इस महान कार्य को और इतिहास के प्रवाह के अनुसार अपने कन्धों पर खड़े हुए कार्य को पूर्ण करना स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र का कर्तव्य है। इसके लिए उन जीवन मूल्यों पर अधिष्ठित , संगठित, सामथ्र्य संपन्न ओर एकात्म राष्ट्र जीवन भारतवर्ष में उत्पन्न करना आवश्यक है। भारत की भावी सन्तानों के लिए श्रीकृष्ण के पूर्णावतार का यही संदेश है।
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