कांग्रेस आज भले ही श्री Pranab mukherjee जी के नागपुर जाने पर सवाल उठा रही हो लेकिन विपक्षी दल को यह भी याद रखकर बोलना चाहिए कि इसी Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के वर्धा शिविर में वर्ष 1934 में महात्मा गांधी जी गए थे। यही नहीं, गांधी जी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन, जयप्रकाश नारायण और सेना के पूर्व जनरल करियप्पा भी संघ शाखा जा चुके हैं। गांधी जी ने तो अनुशासन के लिए संघ की तारीफ भी की थी और वह संघ के खिचड़ी भोज में सभी वर्ग के लोगों के एक साथ भोजन करने के कार्यक्रम से प्रभावित भी हुए थे। बापू ने 16 सितंबर 1947 की सुबह दिल्ली में संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा था कि
”बरसों पहले मैं वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक शिविर में गया था. उस समय इसके संस्थापक श्री हेडगेवार जीवित थे। स्व. श्री जमनालाल बजाज मुझे शिविर में ले गये थे और वहां मैं उन लोगों का कड़ा अनुशासन, सादगी और छुआछूत की पूर्ण समाप्ति देखकर अत्यन्त प्रभावित हुआ था। संघ एक सुसंगठित, अनुशासित संस्था है.”
विपक्षी दल भले ही Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) पर सवाल उठा रही हो लेकिन विपक्षी दल को यह भी याद होना चाहिए कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान संघ की भूमिका से नेहरू इतने प्रभावित हुए थे कि वर्ष 1963 में गणतंत्र दिवस की परेड में संघ को आमंत्रित किया था। उस वक्त 3,000 स्वंयसेवकों गणवेश के साथ परेड में हिस्सा लिया था।
विपक्षी दल को बापू की मर्यादा का ख्याल करते हुए श्री प्रणब मुखर्जी जी और संघ पर सवाल उठाना चाहिए..
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